का भविष्य निश्चित काने का वीरोचित निर्णय हो जाने के बाद श्रीमंत नाना का एकमात्र लक्ष्य था उस निर्णय को कार्य-रूप देना। स्वराज्य-प्राप्ति के लिए जो क्रांतियुद्व लड़ना है उसे सफलता मिले, इसके लिए दो बातें अनिवार्य थी। पहली बात हिंदुस्थान के समस्त लोगों में स्वतंत्रत की जंगी और अनिवार्य इच्छा उत्पन्न होना और फिर उस इच्छा की सिद्वि के लिए-एक ही समय में पूरे देश द्वारा विद्रोह करना, हिंदुस्थान के समस्त लोगों
का भविष्य निश्चित काने का वीरोचित निर्णय हो जाने के बाद श्रीमंत नाना का एकमात्र लक्ष्य था उस निर्णय को कार्य-रूप देना। स्वराज्य-प्राप्ति के लिए जो क्रांतियुद्व लड़ना है उसे सफलता मिले, इसके लिए दो बातें अनिवार्य थी। पहली बात हिंदुस्थान के समस्त लोगों में स्वतंत्रत की जंगी और अनिवार्य इच्छा उत्पन्न होना और फिर उस इच्छा की सिद्वि के लिए-एक ही समय में पूरे देश द्वारा विद्रोह करना, हिंदुस्थान के समस्त लोगों