1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

में स्वतंत्रता की जंगी और अनिवार्य इच्छा उत्पन्न होना और फिर उस इच्छा की सिद्वि के लिए-एक ही समय में पूरे देश द्वारा विद्रोह करना, हिंदुस्थान के इतिहास को स्वतंत्रतागामी करना-ये दोनों ही काम विदेशियों को चकमा देकर ही किए जा सकते थे। क्योंकि जिस किसी परतंत्र देश के मन में स्वतंत्रता संग्राम छेड़ने की इच्छा हो उस देश मंे उस संग्राम की तैयारी गुप्त रीति से ही करनी पड़ती है। अन्यथा आंरभ में ही अमोघ शक्ति


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में स्वतंत्रता की जंगी और अनिवार्य इच्छा उत्पन्न होना और फिर उस इच्छा की सिद्वि के लिए-एक ही समय में पूरे देश द्वारा विद्रोह करना, हिंदुस्थान के इतिहास को स्वतंत्रतागामी करना-ये दोनों ही काम विदेशियों को चकमा देकर ही किए जा सकते थे। क्योंकि जिस किसी परतंत्र देश के मन में स्वतंत्रता संग्राम छेड़ने की इच्छा हो उस देश मंे उस संग्राम की तैयारी गुप्त रीति से ही करनी पड़ती है। अन्यथा आंरभ में ही अमोघ शक्ति


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