से हमला कर बलवान शत्रु उस प्रयास को चूर-चूर कर सकता है। यह ऐतिहासिक सत्य जानकर दोनों महान् विभूतियों-श्रीमंत नाना साहब और अजीमुल्ला खान ने सन् 1856 के प्रांरभ में स्वतंत्रता के लिए हिंदुस्थान को तन और मन से जाग्रत करने के लिए युद्ध संगठन बनाया।
हिंदुस्थान में जितने राजे-रजवाड़े हैं उन सभी में यदि अंगे्रजों के विरूद्ध उठने की इच्छा उत्पन्न हो गई तो एक क्षण में ही अपना देश अपने हाथ आ जाएगा, यह तथ्य
से हमला कर बलवान शत्रु उस प्रयास को चूर-चूर कर सकता है। यह ऐतिहासिक सत्य जानकर दोनों महान् विभूतियों-श्रीमंत नाना साहब और अजीमुल्ला खान ने सन् 1856 के प्रांरभ में स्वतंत्रता के लिए हिंदुस्थान को तन और मन से जाग्रत करने के लिए युद्ध संगठन बनाया।
हिंदुस्थान में जितने राजे-रजवाड़े हैं उन सभी में यदि अंगे्रजों के विरूद्ध उठने की इच्छा उत्पन्न हो गई तो एक क्षण में ही अपना देश अपने हाथ आ जाएगा, यह तथ्य