1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

नाना के ध्यान में पहले ही आ गया था। इन हिंदुस्तानी सिर चढे़ राजाओं से आगे-पीछे अंगे्रजी राज को धोखा होगा, यह जानकर ही अंगे्रजी सरकार एक के बाद दूसरी रियासत छीनती चली जा रही है, यह वास्तविक स्थिति सारे राजे-राजवाड़ों के आगे रख उनके मन को स्वतंत्रतागामी करने के लिए नाना ने हर दरबार में अपना दूत भेजना प्रारंभ किया। कोल्यहापुर, दक्षिण की सारी पटवर्धनी रियासतों, अवध के जमींदारों और दिल्ली से मैसूर तक की


329 of 2102

नाना के ध्यान में पहले ही आ गया था। इन हिंदुस्तानी सिर चढे़ राजाओं से आगे-पीछे अंगे्रजी राज को धोखा होगा, यह जानकर ही अंगे्रजी सरकार एक के बाद दूसरी रियासत छीनती चली जा रही है, यह वास्तविक स्थिति सारे राजे-राजवाड़ों के आगे रख उनके मन को स्वतंत्रतागामी करने के लिए नाना ने हर दरबार में अपना दूत भेजना प्रारंभ किया। कोल्यहापुर, दक्षिण की सारी पटवर्धनी रियासतों, अवध के जमींदारों और दिल्ली से मैसूर तक की


329 of 2102