प्रयास करके देखें और मरना ही है तो बादशाही की शान से मरें-ऐसा विचार राजमहल में होने लगा। इस काम में प्रमुख इस्लामी सत्ताओं की सहायता मिले, इसलिए मैं सुन्नी पंथ छोड़कर अवध के नवाब और ईरान के शाह का शिया पंथ स्वीकार करता हूं, ऐसी घोषणा भी बादशाह ने की। इसी समय अंगे्रजों की ईरान से लड़ाई शुरू हुई। हिंदुस्थान में भी उसी समय विद्रोह होना अपने लिए लाभदायक है, यह देखकर ईरान के शाह ने सन् 1857 के प्रारंभ में
प्रयास करके देखें और मरना ही है तो बादशाही की शान से मरें-ऐसा विचार राजमहल में होने लगा। इस काम में प्रमुख इस्लामी सत्ताओं की सहायता मिले, इसलिए मैं सुन्नी पंथ छोड़कर अवध के नवाब और ईरान के शाह का शिया पंथ स्वीकार करता हूं, ऐसी घोषणा भी बादशाह ने की। इसी समय अंगे्रजों की ईरान से लड़ाई शुरू हुई। हिंदुस्थान में भी उसी समय विद्रोह होना अपने लिए लाभदायक है, यह देखकर ईरान के शाह ने सन् 1857 के प्रारंभ में