दिल्ली की मस्जिदों से इसी प्रकार की सार्वजनिक घोषणाएं होने लगीं-‘‘फिरंगियों के कब्जे से हिंदुस्थान को मुक्त करने ईरानी फौज जल्दी ही आ रही हैं, इसलिए बूढे़, जवान, छोटे-बडे़, सुशिक्षित-अशिक्षित, रैयत और लश्कर सारे लोग इन काफिर लोेगों के शिकंजे से मुक्त होने के लिए रणांगण में कूद पड़ें।’’
इस घोषणापत्र को सारे भारतीय समाचार-पत्रों ने प्रकाशित किया और दिल्ली के लोगों में क्रांतियुद्ध की लहर दौड़ गई। दिल्ली
दिल्ली की मस्जिदों से इसी प्रकार की सार्वजनिक घोषणाएं होने लगीं-‘‘फिरंगियों के कब्जे से हिंदुस्थान को मुक्त करने ईरानी फौज जल्दी ही आ रही हैं, इसलिए बूढे़, जवान, छोटे-बडे़, सुशिक्षित-अशिक्षित, रैयत और लश्कर सारे लोग इन काफिर लोेगों के शिकंजे से मुक्त होने के लिए रणांगण में कूद पड़ें।’’
इस घोषणापत्र को सारे भारतीय समाचार-पत्रों ने प्रकाशित किया और दिल्ली के लोगों में क्रांतियुद्ध की लहर दौड़ गई। दिल्ली