1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के बादशाह के सचिव मुकुंदलाल कहते हैं-‘6राजमंदिर के द्वार पर और महल में मुगल खुले मन से युद्ध की चर्चा करते रहते थें सिपाही जल्दी ही विद्रोह कर राजमहल की ओर आएंगे और फिरंगियों का जुआ उतार फेंककर फिर से अपना राज्य स्थापित करेंगे, ऐसी निश्चयपूर्वक बातें वे करते और अपना राज्य हो जाने पर अपने देश की सारी सत्त एवं सारे अधिकार अपने ही हाथों में रहेंगे। ऐसी आशा से सब लोग उत्साहित हो जाते।’’ इस लोक-जागृति को


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के बादशाह के सचिव मुकुंदलाल कहते हैं-‘6राजमंदिर के द्वार पर और महल में मुगल खुले मन से युद्ध की चर्चा करते रहते थें सिपाही जल्दी ही विद्रोह कर राजमहल की ओर आएंगे और फिरंगियों का जुआ उतार फेंककर फिर से अपना राज्य स्थापित करेंगे, ऐसी निश्चयपूर्वक बातें वे करते और अपना राज्य हो जाने पर अपने देश की सारी सत्त एवं सारे अधिकार अपने ही हाथों में रहेंगे। ऐसी आशा से सब लोग उत्साहित हो जाते।’’ इस लोक-जागृति को


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