1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जिहाद का आह्यवन करने आगे आए। सन् 1857 के अप्रैल माह में ऐसा ही एक देशभक्त फकीर वहां की सैनिक छावनी में आया। उसके पास हाथी-घोड़े आदि तथा अन्य संरजाम भी था। वहां के सिपाहियों को राजनीतिक जिहाद की दीक्षा देने में वह मग्न था-परंतु अंगे्रज अधिकारियों को उसपर शंका हुई और उन्होंने उसे वहां से निकल जाने का आदेश दिया। यह आदेश होते ही फकीर वहां से तो निकल गया, परंतु पास के ही एक गांव में घुसकर फिर अपनी गुप्त


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जिहाद का आह्यवन करने आगे आए। सन् 1857 के अप्रैल माह में ऐसा ही एक देशभक्त फकीर वहां की सैनिक छावनी में आया। उसके पास हाथी-घोड़े आदि तथा अन्य संरजाम भी था। वहां के सिपाहियों को राजनीतिक जिहाद की दीक्षा देने में वह मग्न था-परंतु अंगे्रज अधिकारियों को उसपर शंका हुई और उन्होंने उसे वहां से निकल जाने का आदेश दिया। यह आदेश होते ही फकीर वहां से तो निकल गया, परंतु पास के ही एक गांव में घुसकर फिर अपनी गुप्त


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