1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

लिए सन् 1857 के उस गुप्त संगठन के प्रचंड प्रयास चल रहे थे।

इस संगठन के गुप्त केंद्र अब सब स्थानों पर फैल गए थे। इस गुप्त संगठन की जिस राजभवन में प्रथम प्राण-प्रतिष्ठा हुई उस ब्रह्यवर्त में तो उसकी बढ़त जोरदार ही रही थी; परंतु श्री नाना के और अजीमुल्ला के पत्रों ने और उपदेशकों ने अब हजारों स्थानों पर उस रचना की शाखाएं खोल दी थी। ब्रह्यवर्त मंे नाना का निवास आगामी मंगल कार्य की तैयारी में जैसे जुटा


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लिए सन् 1857 के उस गुप्त संगठन के प्रचंड प्रयास चल रहे थे।

इस संगठन के गुप्त केंद्र अब सब स्थानों पर फैल गए थे। इस गुप्त संगठन की जिस राजभवन में प्रथम प्राण-प्रतिष्ठा हुई उस ब्रह्यवर्त में तो उसकी बढ़त जोरदार ही रही थी; परंतु श्री नाना के और अजीमुल्ला के पत्रों ने और उपदेशकों ने अब हजारों स्थानों पर उस रचना की शाखाएं खोल दी थी। ब्रह्यवर्त मंे नाना का निवास आगामी मंगल कार्य की तैयारी में जैसे जुटा


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