1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

दिखता था वैसी ही दिल्ली के महल में भी तैयारी की धूमधाम थी। इधर लखनऊ और आगरा में उस देशभक्त-मौलवी अहमद शाह मंे जिहाद के बीज इतने गहरे उतर गए कि वह सारा शहर जैसे किसी क्रांतिकारी दल का गढ़ बन गयां मौलवी, पंडित, जमींदार, किसान, व्यापारी, वकील, विद्यार्थी ऐसी सारी जातियां और सारे पंथ स्वधर्मार्थ और स्वदेशार्थ अपने प्राणदान करने की दीक्षा लेकर सज्जित हो गए थे और इस गुप्त रचना की अगुवाई करनेवालों में सबसे


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दिखता था वैसी ही दिल्ली के महल में भी तैयारी की धूमधाम थी। इधर लखनऊ और आगरा में उस देशभक्त-मौलवी अहमद शाह मंे जिहाद के बीज इतने गहरे उतर गए कि वह सारा शहर जैसे किसी क्रांतिकारी दल का गढ़ बन गयां मौलवी, पंडित, जमींदार, किसान, व्यापारी, वकील, विद्यार्थी ऐसी सारी जातियां और सारे पंथ स्वधर्मार्थ और स्वदेशार्थ अपने प्राणदान करने की दीक्षा लेकर सज्जित हो गए थे और इस गुप्त रचना की अगुवाई करनेवालों में सबसे


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