1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

1857 का वर्ष आते ही सारे सिपाही राष्ट्रकार्य में मिल जाने के लिए शिवजी का बेल पत्र उठाकर या गंगाजल हाथ में लेकर या कुरान की कसम लेकर वचनबद्ध हो गए थे और अवध के नवाब ने भी उन्हें उदारता का वचन दिया था। सिपाहियों के सारे ठिकानों पर रात को गुप्त बैठकें होतीं और वहां शपथ-विधि संपन्न होते ही दूसरे दिन उस रेजीमेंट का सूबेदार नवाब के यहां जाकर स्वतंत्रता संग्राम के लिए उनसे मिलने का वचन दे आता। इन सिपाहियों


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1857 का वर्ष आते ही सारे सिपाही राष्ट्रकार्य में मिल जाने के लिए शिवजी का बेल पत्र उठाकर या गंगाजल हाथ में लेकर या कुरान की कसम लेकर वचनबद्ध हो गए थे और अवध के नवाब ने भी उन्हें उदारता का वचन दिया था। सिपाहियों के सारे ठिकानों पर रात को गुप्त बैठकें होतीं और वहां शपथ-विधि संपन्न होते ही दूसरे दिन उस रेजीमेंट का सूबेदार नवाब के यहां जाकर स्वतंत्रता संग्राम के लिए उनसे मिलने का वचन दे आता। इन सिपाहियों


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