1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

खड़ा हुआ। हर एक सिपाही दिन में अपनी बंदूक को रगड़-रगड़कर साफ करता और रात होते ही अपनी रेजिमेंट के सूबेदार मेजर के बंगले पर आयोजित होनेवाली गुप्त बैठकों में जाकर स्वतंत्रता संग्राम के लिए शपथ दिलाने के लिए भोज के कार्यक्रम आयोजित करते। इन भोजों के समय एक-दूसरे से योजना कही जाती और उन योजनाओं को फिर नाना साहब या अली नक्की खान को बताया जाता। कुछ रेजिमेंटों में ऐसी क्रांति घटना चलते हुए गलती या विश्वासघात


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खड़ा हुआ। हर एक सिपाही दिन में अपनी बंदूक को रगड़-रगड़कर साफ करता और रात होते ही अपनी रेजिमेंट के सूबेदार मेजर के बंगले पर आयोजित होनेवाली गुप्त बैठकों में जाकर स्वतंत्रता संग्राम के लिए शपथ दिलाने के लिए भोज के कार्यक्रम आयोजित करते। इन भोजों के समय एक-दूसरे से योजना कही जाती और उन योजनाओं को फिर नाना साहब या अली नक्की खान को बताया जाता। कुछ रेजिमेंटों में ऐसी क्रांति घटना चलते हुए गलती या विश्वासघात


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