1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पर टूट पड़ेंगे।’’ बैरकपुर से सियालकोट जैसे दूर देश भेजे गए पत्र पकड़े गए थे। उनमें एक में बैरकपुर के सिपाही सियालकोट के सिपाहियों को लिखते हैं-‘‘भाइयों, शत्रुओं के विरूद्ध उठो!’’

रूसी क्रांति की तरह ही हिंदुस्थान के क्रांतियुद्ध में भी पुलिसवाले जनता से बहुत सहानुभूति बरतते थे। क्रांति के गुप्त संगठन यंत्र का प्रचंड पहिया अब तीव्र गति से


1857 का स्वातंत्र्य समर - 87

घूमने लगा था। ऐसे समय में विभिन्न पहियों की गति एक लय में घूमने लगे,


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पर टूट पड़ेंगे।’’ बैरकपुर से सियालकोट जैसे दूर देश भेजे गए पत्र पकड़े गए थे। उनमें एक में बैरकपुर के सिपाही सियालकोट के सिपाहियों को लिखते हैं-‘‘भाइयों, शत्रुओं के विरूद्ध उठो!’’

रूसी क्रांति की तरह ही हिंदुस्थान के क्रांतियुद्ध में भी पुलिसवाले जनता से बहुत सहानुभूति बरतते थे। क्रांति के गुप्त संगठन यंत्र का प्रचंड पहिया अब तीव्र गति से


1857 का स्वातंत्र्य समर - 87

घूमने लगा था। ऐसे समय में विभिन्न पहियों की गति एक लय में घूमने लगे,


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