1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ऐसा प्रयास आवश्यक था। इसी उद्देश्य से क्रांति पक्ष का एक दूत हाथ में रक्त कमल पुष्प लेकर बंगाल की सैनिक छावनी में प्रवेश करता और अपने हाथ का फूल पहली टुकड़ी के मुख्य भारतीय अधिकारी को देता। भारतीय अधिकारी उसे अपने निचले आदमी को देता-और इस तरह वह कमल हर सिपाही के हाथ से होकर अंतिम सिपाही तक और अंतिम सिपाही से फिर आए हुए उस क्रांतिदूत के हाथ लौट आता। बस, इतना काफी था! इस तरह एक शब्द भी बोले बिना वह क्रांतिदूत


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ऐसा प्रयास आवश्यक था। इसी उद्देश्य से क्रांति पक्ष का एक दूत हाथ में रक्त कमल पुष्प लेकर बंगाल की सैनिक छावनी में प्रवेश करता और अपने हाथ का फूल पहली टुकड़ी के मुख्य भारतीय अधिकारी को देता। भारतीय अधिकारी उसे अपने निचले आदमी को देता-और इस तरह वह कमल हर सिपाही के हाथ से होकर अंतिम सिपाही तक और अंतिम सिपाही से फिर आए हुए उस क्रांतिदूत के हाथ लौट आता। बस, इतना काफी था! इस तरह एक शब्द भी बोले बिना वह क्रांतिदूत


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