1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

अपनी स्वतंत्रता के लिए जिहाद करने को तैयार हो गई है, यह शुभ वात्र्ता उसके बच्चों को सुनाने दसों दिशाओं में दौड़कर जा। तुम्हारी मां पर संकट है, अतः उसके बचाव के लिए दौड़! दौड़! ऐसी कर्कश चिल्लाहट करते हुए आधी रात में भी न रूकते निरंतर दौड़ता रह! गढ़ और कोट के दरवाजे बंद हैं, तथापि उनके खुलने तक न रूकते वहां आकाश मार्ग से पहुंच जा।

घाटियां गहरी हैं, कगार टूटे हुए हैं, नदियां विराट् हैं, वन भयानक हैं। परंतु


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अपनी स्वतंत्रता के लिए जिहाद करने को तैयार हो गई है, यह शुभ वात्र्ता उसके बच्चों को सुनाने दसों दिशाओं में दौड़कर जा। तुम्हारी मां पर संकट है, अतः उसके बचाव के लिए दौड़! दौड़! ऐसी कर्कश चिल्लाहट करते हुए आधी रात में भी न रूकते निरंतर दौड़ता रह! गढ़ और कोट के दरवाजे बंद हैं, तथापि उनके खुलने तक न रूकते वहां आकाश मार्ग से पहुंच जा।

घाटियां गहरी हैं, कगार टूटे हुए हैं, नदियां विराट् हैं, वन भयानक हैं। परंतु


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