1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

बहन एवं भाई सबको स्वतंत्रता संग्राम की कार्य-सिद्धि के लिए सपरिवार आने का निमंत्रण देना। कानपुर के देवता को बुलाना; शंख, भेरी, दुंदुभि, ध्वज, पताका, रणगीत, गर्जना, गड़गड़ाहट आदि सारे सगे-संबंधियों को इस युद्ध कार्य की इश्ट सिद्वि के लिए बुला लाना। कुल देवता, ग्राम देवता एवं राश्ट्र देवता अपने-अपने अनुचरों सहित स्वातंन्न्य समर के मंगल समारोह के लिए सुसज्ज होकर उत्सुक हैं-उन सबसे कह-‘अति समयों वर्तते’ सावधान!


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बहन एवं भाई सबको स्वतंत्रता संग्राम की कार्य-सिद्धि के लिए सपरिवार आने का निमंत्रण देना। कानपुर के देवता को बुलाना; शंख, भेरी, दुंदुभि, ध्वज, पताका, रणगीत, गर्जना, गड़गड़ाहट आदि सारे सगे-संबंधियों को इस युद्ध कार्य की इश्ट सिद्वि के लिए बुला लाना। कुल देवता, ग्राम देवता एवं राश्ट्र देवता अपने-अपने अनुचरों सहित स्वातंन्न्य समर के मंगल समारोह के लिए सुसज्ज होकर उत्सुक हैं-उन सबसे कह-‘अति समयों वर्तते’ सावधान!


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