1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

हे विश्व! यह हमारा तपोधन हिंदुस्थान शम-प्रधान है, यह सच है; पर इसलिए तुम इसके इस

शम-प्रधानत्व का अनुचित लाभ् मत उठाना। क्योंकि इस तपोनिधि के शरीर में प्रदाहक, प्रचंड शक्तियां भी गूढ़ता से भरी हुई है। शंकर के तीसरे नेत्र की कथा क्या तुमने कभी सुनी है? वह नेत्र जब तक खुलता नही ंतब तक बहुत शांत रहता है। परंतु उसके खुलते ही पूरे विश्व को राख करने में सक्षम ज्वालाएं उसी में से निकलती हैं। तूने कभी ज्वालामुखी


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हे विश्व! यह हमारा तपोधन हिंदुस्थान शम-प्रधान है, यह सच है; पर इसलिए तुम इसके इस

शम-प्रधानत्व का अनुचित लाभ् मत उठाना। क्योंकि इस तपोनिधि के शरीर में प्रदाहक, प्रचंड शक्तियां भी गूढ़ता से भरी हुई है। शंकर के तीसरे नेत्र की कथा क्या तुमने कभी सुनी है? वह नेत्र जब तक खुलता नही ंतब तक बहुत शांत रहता है। परंतु उसके खुलते ही पूरे विश्व को राख करने में सक्षम ज्वालाएं उसी में से निकलती हैं। तूने कभी ज्वालामुखी


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