1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

को देखा है। वह ज्वालामुखी ऊपर से हरा-भरा रहता है, पर यदि वह एक बार अपना जबड़ा खोलने लगे तो उसके उबलते अग्नि रस से दसों दिशाएं जलने लगती हैं। परंतु इस सामान्य ज्वालामुखी से भी जाज्वल्यतर यह हिंदुस्थान का जीवित ज्वालामुखी अब खौलने लग गया है। उसके उदर के भयंकर अग्नि रस में लहरें उठने लगी हैं। उसके दाहक द्रव्य एक-दूसरे में मिल रहे हैं और उनपर स्वातंन्न्य-प्रेम की चिंगारी गिर गई है। उसके मस्तक पर नाचनेवालो,


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को देखा है। वह ज्वालामुखी ऊपर से हरा-भरा रहता है, पर यदि वह एक बार अपना जबड़ा खोलने लगे तो उसके उबलते अग्नि रस से दसों दिशाएं जलने लगती हैं। परंतु इस सामान्य ज्वालामुखी से भी जाज्वल्यतर यह हिंदुस्थान का जीवित ज्वालामुखी अब खौलने लग गया है। उसके उदर के भयंकर अग्नि रस में लहरें उठने लगी हैं। उसके दाहक द्रव्य एक-दूसरे में मिल रहे हैं और उनपर स्वातंन्न्य-प्रेम की चिंगारी गिर गई है। उसके मस्तक पर नाचनेवालो,


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