इतने में लेफ्टिनेंट बाॅ भी वहां आ गया। इससे पहले कि उसका घोड़ा नाचते-नाचते आगे सरकता, मंगल पांडे की बंदूक से दूसरी गोली छूटी और वह उस घोड़े के पेट में घुसते ही घोड़ा लेफ्टिनेंट को लेकर धड़ाम से गिरा। मंगल पांडे को बंदूक भरने का अवसर मिले, इसके
1857 का स्वातंत्र्य समर - 97
पहले ही धूल में पड़े लेफ्टिनेंट ने अपनी पिस्तौल निकाल ली। यह देखते ह मंगल पांडे ने तिल भर भी डगमगाए बिना अपनी शमशीर निकाली। बाॅ ने पिस्तौल चलाई,
इतने में लेफ्टिनेंट बाॅ भी वहां आ गया। इससे पहले कि उसका घोड़ा नाचते-नाचते आगे सरकता, मंगल पांडे की बंदूक से दूसरी गोली छूटी और वह उस घोड़े के पेट में घुसते ही घोड़ा लेफ्टिनेंट को लेकर धड़ाम से गिरा। मंगल पांडे को बंदूक भरने का अवसर मिले, इसके
1857 का स्वातंत्र्य समर - 97
पहले ही धूल में पड़े लेफ्टिनेंट ने अपनी पिस्तौल निकाल ली। यह देखते ह मंगल पांडे ने तिल भर भी डगमगाए बिना अपनी शमशीर निकाली। बाॅ ने पिस्तौल चलाई,