1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

यह तो ज्ञात नहीं, परंतु उसके नाम-स्मरण से भी मन की उदात्त वृत्तियां खिलने लगती हैं। परंतु जिनकी दृश्टि को मंगल पांडे के प्रत्यक्ष दर्षन का लाभ हुआ था-


1857 का स्वातंत्र्य समर - 98

बैरकपुर के ऐसे सारे नागरिकों के हृदय में उसके प्रति दिव्य प्रीति उत्पन्न हुई हो तो इसमें क्या आष्चर्य! उस सारे बैरकपुर षहर में मंगल पांडे को फांसी देने के लिए एक भी जल्लाद नहीं मिला। अंत में उस अमंगल कार्य के लिए कलकत्ता


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यह तो ज्ञात नहीं, परंतु उसके नाम-स्मरण से भी मन की उदात्त वृत्तियां खिलने लगती हैं। परंतु जिनकी दृश्टि को मंगल पांडे के प्रत्यक्ष दर्षन का लाभ हुआ था-


1857 का स्वातंत्र्य समर - 98

बैरकपुर के ऐसे सारे नागरिकों के हृदय में उसके प्रति दिव्य प्रीति उत्पन्न हुई हो तो इसमें क्या आष्चर्य! उस सारे बैरकपुर षहर में मंगल पांडे को फांसी देने के लिए एक भी जल्लाद नहीं मिला। अंत में उस अमंगल कार्य के लिए कलकत्ता


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