1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

से चार जल्लाद लाए गए। दिनांक 8 अप्रैल को सुबह मंगल पांडे को फांसी-स्थल की ओर ले जाया गया। चारों ओर लष्करी लोगों का पहरा था। उनके बीच से मंगल पांडे गर्व से चलता चला गया और फांसी पर चढ़ गया। ‘‘मैं किसी के नाम नहीं बताऊंगा,’’ यह एक बार फिर से कहते ही उसके पैर के नीचे का सहारा निकाल लिया गया और मंगल पांडे की देह से उसकी पवित्र आत्मा स्वर्ग चली गई।

इस तरह सन्1857 के क्रातियुद्ध की पहली भिड़त हुई और इस रीति


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से चार जल्लाद लाए गए। दिनांक 8 अप्रैल को सुबह मंगल पांडे को फांसी-स्थल की ओर ले जाया गया। चारों ओर लष्करी लोगों का पहरा था। उनके बीच से मंगल पांडे गर्व से चलता चला गया और फांसी पर चढ़ गया। ‘‘मैं किसी के नाम नहीं बताऊंगा,’’ यह एक बार फिर से कहते ही उसके पैर के नीचे का सहारा निकाल लिया गया और मंगल पांडे की देह से उसकी पवित्र आत्मा स्वर्ग चली गई।

इस तरह सन्1857 के क्रातियुद्ध की पहली भिड़त हुई और इस रीति


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