1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



उत्तर प्रदेष के उच्च पुरबिया ब्राह्यण कुल में जनमे मंगल पांडे का रक्त केवल बंगाल में ही स्वतंत्रता के बीज नहीं जमा रहा था, उधर अंबाला में भी उसकी विद्युत चेतना का संचार हो गया था। अंबाला में सिपाहियों ने एक नई पद्धति चालू की थी। वह था-यदि कोई अधिकारी उनके विरूद्ध जाए तो उसका घर-बार जलाकर भस्म कर डालना। रोज रात को देशद्रोहियों और विदेशियों के घर जलने लगे। यह काम इस झटके से और गुप्त ढंग से होता मानो


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उत्तर प्रदेष के उच्च पुरबिया ब्राह्यण कुल में जनमे मंगल पांडे का रक्त केवल बंगाल में ही स्वतंत्रता के बीज नहीं जमा रहा था, उधर अंबाला में भी उसकी विद्युत चेतना का संचार हो गया था। अंबाला में सिपाहियों ने एक नई पद्धति चालू की थी। वह था-यदि कोई अधिकारी उनके विरूद्ध जाए तो उसका घर-बार जलाकर भस्म कर डालना। रोज रात को देशद्रोहियों और विदेशियों के घर जलने लगे। यह काम इस झटके से और गुप्त ढंग से होता मानो


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