धर्म की रक्षा के लिए कारावास में जा रहे उन सिपाहियों को स्वदेश बंधुओं ने कैसे नेत्र संकेत किए, यह भविष्य शीघ्र ही कहेगा। गाय और सूअर के रक्त से बने कारतूस अपने पर जबरन लादे जाएं और उसे कोई रोके तो उसे दस वर्ष के कठोर कारावास का दंड भुगतना पड़े, ऐसा भयंकर अपराध जिस दासता में होता है, उस फिरंगी दासता का हम टेंटुआ दबाएगें और दस वर्ष के लिए तुम्हें पहनाई गई बेड़ियां और सौ वर्षों से अपनी मातृभूमि के पैरों
धर्म की रक्षा के लिए कारावास में जा रहे उन सिपाहियों को स्वदेश बंधुओं ने कैसे नेत्र संकेत किए, यह भविष्य शीघ्र ही कहेगा। गाय और सूअर के रक्त से बने कारतूस अपने पर जबरन लादे जाएं और उसे कोई रोके तो उसे दस वर्ष के कठोर कारावास का दंड भुगतना पड़े, ऐसा भयंकर अपराध जिस दासता में होता है, उस फिरंगी दासता का हम टेंटुआ दबाएगें और दस वर्ष के लिए तुम्हें पहनाई गई बेड़ियां और सौ वर्षों से अपनी मातृभूमि के पैरों