1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

में पड़ी गुलामी की बेड़ियां इन दोनों को जल्दी ही तोड़ देंगे, यह उन नेत्र संकेतों का अर्थ हो सकता है।

यह घटना प्रातःकाल की थी। प्रिय देशबंधुओं को अपनी आंखों के सामने परदेशी और परधर्मी लोग बेड़ियां डालकर कारावास में डालें और उस दृश्य को खुली आंखों से देखें, इसका दुःख झेलते, मन-ही-मन जलते सिपाहियों का अपनी-अपनी बैरकों में लौटते ही धीरज टूटने लगा। शहर के बाजार में वे गए तो वहां की महिलाएं उनका तिरस्कार कर


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में पड़ी गुलामी की बेड़ियां इन दोनों को जल्दी ही तोड़ देंगे, यह उन नेत्र संकेतों का अर्थ हो सकता है।

यह घटना प्रातःकाल की थी। प्रिय देशबंधुओं को अपनी आंखों के सामने परदेशी और परधर्मी लोग बेड़ियां डालकर कारावास में डालें और उस दृश्य को खुली आंखों से देखें, इसका दुःख झेलते, मन-ही-मन जलते सिपाहियों का अपनी-अपनी बैरकों में लौटते ही धीरज टूटने लगा। शहर के बाजार में वे गए तो वहां की महिलाएं उनका तिरस्कार कर


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