फिर भी दूसरों की राह देखते चुप बैठना? 31 मई की तारीख अभी कितनी दूर है। तब तक उन फिरंगियों के झंडे तले रहना? नहीं-नहीं, कल ही रविवार है। इस रविवार का सूर्य नारायण अस्तमान होने के पहले कारावास के उन देशवीरों की बेड़ियां टूट ही जानी चाहिए। स्वदेश जननी की बेड़ियां टूटनी ही चाहिए और स्वतंत्रता का झंडा लहराना ही चाहिए। तत्काल दिल्ली संदेश भेजे गए-‘‘हम तारीख 11 या 12 को वहां आ रहे हैं; सारी तैयारी करके रखो।-’’
फिर भी दूसरों की राह देखते चुप बैठना? 31 मई की तारीख अभी कितनी दूर है। तब तक उन फिरंगियों के झंडे तले रहना? नहीं-नहीं, कल ही रविवार है। इस रविवार का सूर्य नारायण अस्तमान होने के पहले कारावास के उन देशवीरों की बेड़ियां टूट ही जानी चाहिए। स्वदेश जननी की बेड़ियां टूटनी ही चाहिए और स्वतंत्रता का झंडा लहराना ही चाहिए। तत्काल दिल्ली संदेश भेजे गए-‘‘हम तारीख 11 या 12 को वहां आ रहे हैं; सारी तैयारी करके रखो।-’’