10 मई का रवि उदय हुआ। सन् 1857 की गुप्त तैयारी की अंगे्रजों को इतनी कम जानकारी थी कि मेरठ के सिपाहियों की दूसरों से तो क्या आपस में भी कुछ सामान्य योजना बन रही है, इसकी भी उनको आशंका नहीं हुई। रविवार को सुबह उनका नित्यकर्म शांति से शुरू हुआ। घोड़े की गाड़ियां, शीत उपचार, सुगंन्धित फूल, हवाखोरी, गाना-बजाना-सारी बातें हमेशा की तरह चालू हो गई। साहबों के घर के नेटिव नौकर अकस्मात् नौकरी पर नहीं आए, इसका भी उन्हें कोई अधिक आश्चर्य नहीं हुआ।
10 मई का रवि उदय हुआ। सन् 1857 की गुप्त तैयारी की अंगे्रजों को इतनी कम जानकारी थी कि मेरठ के सिपाहियों की दूसरों से तो क्या आपस में भी कुछ सामान्य योजना बन रही है, इसकी भी उनको आशंका नहीं हुई। रविवार को सुबह उनका नित्यकर्म शांति से शुरू हुआ। घोड़े की गाड़ियां, शीत उपचार, सुगंन्धित फूल, हवाखोरी, गाना-बजाना-सारी बातें हमेशा की तरह चालू हो गई। साहबों के घर के नेटिव नौकर अकस्मात् नौकरी पर नहीं आए, इसका भी उन्हें कोई अधिक आश्चर्य नहीं हुआ।