1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar




1857 का स्वातंत्र्य समर - 103

इधर सिपाहियों के बीच बहस चल रही थी कि पूरा कत्लेआम करना है या नहीं। 20वीं पलटन और तीसरी घुड़सवार पलटन के सिपाही बोले,‘‘चर्च में फिरंगियों के जाते ही ‘हर-हर महादेव’’ बोलो। और लश्करी ओर मुलुकी, सैनिक और नागरिक बच्चे-औरतें-मर्द-जो मिले उसे काटते दिल्ली चलों।’’ यहीं अंत में तय हुआ।

इधर मेरठ में पास-पड़ोस के गांवों से भी टूटे-टाटे शस्त्र हाथ में लिये हजारों लोग आकर मिल


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1857 का स्वातंत्र्य समर - 103

इधर सिपाहियों के बीच बहस चल रही थी कि पूरा कत्लेआम करना है या नहीं। 20वीं पलटन और तीसरी घुड़सवार पलटन के सिपाही बोले,‘‘चर्च में फिरंगियों के जाते ही ‘हर-हर महादेव’’ बोलो। और लश्करी ओर मुलुकी, सैनिक और नागरिक बच्चे-औरतें-मर्द-जो मिले उसे काटते दिल्ली चलों।’’ यहीं अंत में तय हुआ।

इधर मेरठ में पास-पड़ोस के गांवों से भी टूटे-टाटे शस्त्र हाथ में लिये हजारों लोग आकर मिल


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