1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

रहे थे। स्वदेश-कार्य के लिए आए उन ग्रामीणों की तरह मेरठ के नागरिक भी सज्जित होने लगे। फिर भी अंगे्रजों को तिनके भर जानकारी नहीं थी।

रविवार की शाम के पांच बजे चर्च का घंटा उस शांत वातावरण में हलके-हलके बनजे लगा और अंगे्रज लोग अपनी-अपनी पत्नियांे सहित हंसते-खेलते चर्च की ओर जाने लगे। परंतु उस दिन का चर्च का घंटा अंगे्रजों के लिए प्रार्थना नहीं बजा रहा था-वह तो उनकी मृत्यु वेला बजा रहा था। क्योंकि उधर


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रहे थे। स्वदेश-कार्य के लिए आए उन ग्रामीणों की तरह मेरठ के नागरिक भी सज्जित होने लगे। फिर भी अंगे्रजों को तिनके भर जानकारी नहीं थी।

रविवार की शाम के पांच बजे चर्च का घंटा उस शांत वातावरण में हलके-हलके बनजे लगा और अंगे्रज लोग अपनी-अपनी पत्नियांे सहित हंसते-खेलते चर्च की ओर जाने लगे। परंतु उस दिन का चर्च का घंटा अंगे्रजों के लिए प्रार्थना नहीं बजा रहा था-वह तो उनकी मृत्यु वेला बजा रहा था। क्योंकि उधर


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