1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पहनाई गई बंेड़ियां थर-थर कांपने लगी। एक देशभिमानी लुहार आगे आया और उसने जल्द ही उन बेड़ियों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। प्रचंड वीर गर्जना करते वे कारावास भोग रहे धर्मवीर बाहर आए, घोड़ों पर चढ़े और अपनी मुक्ति के लिए आए देशबंधुओं के साथ उस कारावास को पीछे छोड़ चर्च की ओर पूरे जोश से दौड़े। इधर पैदल टुकड़ी ने दंगा शुरू कर दिया। ग्यारह पलटनों का कर्नल फिनीस अपने घोड़े पर बैठ यों ही उधर आया था। सिपाहियों के सामने खड़ा


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पहनाई गई बंेड़ियां थर-थर कांपने लगी। एक देशभिमानी लुहार आगे आया और उसने जल्द ही उन बेड़ियों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। प्रचंड वीर गर्जना करते वे कारावास भोग रहे धर्मवीर बाहर आए, घोड़ों पर चढ़े और अपनी मुक्ति के लिए आए देशबंधुओं के साथ उस कारावास को पीछे छोड़ चर्च की ओर पूरे जोश से दौड़े। इधर पैदल टुकड़ी ने दंगा शुरू कर दिया। ग्यारह पलटनों का कर्नल फिनीस अपने घोड़े पर बैठ यों ही उधर आया था। सिपाहियों के सामने खड़ा


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