1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

होकर हमेशा की अकड़ के साथ उन्हें डांटने-डपटने लगा तो सिपाही उसका काल बन उस पदा दौड़ पड़े। 20वीं पलटन के एक सिपाही ने अपनी पिस्तौल उस पर चलाई और वह कर्नल अपने घोड़े के साथ भूमि पर गिर गया। पैदल और घुड़सवार, हिंदू और मुसलमान सारे-के-सारे गोरे रक्त के लिए इतने बेचैन हो गए थे कि यह फिनीस का रक्त तो दरिया में खसखस थी। मेरठ के बाजार में यह समाचार पहुंचते ही वह पूरा शहर जलने लगा और जहां-जहां भी अंगे्रज मिला वहां-वहां


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होकर हमेशा की अकड़ के साथ उन्हें डांटने-डपटने लगा तो सिपाही उसका काल बन उस पदा दौड़ पड़े। 20वीं पलटन के एक सिपाही ने अपनी पिस्तौल उस पर चलाई और वह कर्नल अपने घोड़े के साथ भूमि पर गिर गया। पैदल और घुड़सवार, हिंदू और मुसलमान सारे-के-सारे गोरे रक्त के लिए इतने बेचैन हो गए थे कि यह फिनीस का रक्त तो दरिया में खसखस थी। मेरठ के बाजार में यह समाचार पहुंचते ही वह पूरा शहर जलने लगा और जहां-जहां भी अंगे्रज मिला वहां-वहां


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