उसे गारद किया गया। सदर बाजार के सारे लोग हाथ में तलवारें, भाले, लाठियां, छुरियां-जो जिसके हाथ में लगा वह शस्त्र लेकर गली-गली में दौड़ने लगे। जिस किसी भवन पर अंगे्रजी सŸाा के चिहृ थे वे सारे भवन, बंगले, कार्यालय सब आग में जलने लगे। आकाश में धुएं के बादल, अग्नि, अग्नि की रंग-बिरंगी ज्वालाएं हजारों लोगों के हल्ले-गुल्ले की मिली-जुली आवाजें और सबसे ऊंची आवाज-मारों फिरंगी को-
1857 का स्वातंत्र्य समर - 104
उसे गारद किया गया। सदर बाजार के सारे लोग हाथ में तलवारें, भाले, लाठियां, छुरियां-जो जिसके हाथ में लगा वह शस्त्र लेकर गली-गली में दौड़ने लगे। जिस किसी भवन पर अंगे्रजी सŸाा के चिहृ थे वे सारे भवन, बंगले, कार्यालय सब आग में जलने लगे। आकाश में धुएं के बादल, अग्नि, अग्नि की रंग-बिरंगी ज्वालाएं हजारों लोगों के हल्ले-गुल्ले की मिली-जुली आवाजें और सबसे ऊंची आवाज-मारों फिरंगी को-
1857 का स्वातंत्र्य समर - 104