से मेरठ का आकाश भयानक हो उठा। विद्रोह प्रारंभ होते ही पूर्व संकेतों के अनुसार मेरठ से दिल्ली की ओर जानेवाली तार तोड़ डाली गई और उस रास्ते पर अपना कड़ा पहरा बैठा दिया। वह अंधियारी रात होने से अंगे्रजों को बड़ी आफत हुई। कोई तबेले में छुपा तो कोई सारी रात पेड़ के नीचे बैठा रहा-कोई घर की तीसरी मंजिल पर तो कोई जमीन के गड्ढे में। किसी ने किसान का वेश बनाया तो कोई बटलर के पांव पकड़े रहा। विद्रोही सिपाही अंधियारी
से मेरठ का आकाश भयानक हो उठा। विद्रोह प्रारंभ होते ही पूर्व संकेतों के अनुसार मेरठ से दिल्ली की ओर जानेवाली तार तोड़ डाली गई और उस रास्ते पर अपना कड़ा पहरा बैठा दिया। वह अंधियारी रात होने से अंगे्रजों को बड़ी आफत हुई। कोई तबेले में छुपा तो कोई सारी रात पेड़ के नीचे बैठा रहा-कोई घर की तीसरी मंजिल पर तो कोई जमीन के गड्ढे में। किसी ने किसान का वेश बनाया तो कोई बटलर के पांव पकड़े रहा। विद्रोही सिपाही अंधियारी