होते ही दिल्ली की ओर कूच करने लगे थे; परंतु उनके प्रतिशोध का अधूरा काम मेरठ के लोगों ने स्वयं ही पूरा किया। अंग्रेजों के लिए इतना गुस्सा उत्पन्न हुआ था कि अंगे्रजों के स्पर्श होने से जो घर जलाने लायक हो गए थे, पर पत्थर के हाने से जलाए नहीं जा सकते थे, उन्हें चूर-चूर कर दिया गया। वहां के कमिश्नर ग्रीदेड के बंगले को आग लगा दी गई, फिर वह वह अंदर ही छिपा बैठा रहा। यह बात बाहर ज्ञात हुई तो मेरठ के लोग सशस्त्र
होते ही दिल्ली की ओर कूच करने लगे थे; परंतु उनके प्रतिशोध का अधूरा काम मेरठ के लोगों ने स्वयं ही पूरा किया। अंग्रेजों के लिए इतना गुस्सा उत्पन्न हुआ था कि अंगे्रजों के स्पर्श होने से जो घर जलाने लायक हो गए थे, पर पत्थर के हाने से जलाए नहीं जा सकते थे, उन्हें चूर-चूर कर दिया गया। वहां के कमिश्नर ग्रीदेड के बंगले को आग लगा दी गई, फिर वह वह अंदर ही छिपा बैठा रहा। यह बात बाहर ज्ञात हुई तो मेरठ के लोग सशस्त्र