उन हजारों योद्धाओं ने ‘जय जमुनाजी’ कहकर उसका वंदन किया। यमुना से दिल्ली शहर को जोड़नेवाले नाव के पुल पर से भारतीय घोड़े दोड़ते चले जा रहे थे। पर वे किसलिए दोड़ रहे हैं, यह यमुना नदी को ज्ञात है क्या? उसे यह बताए बिना जाना इष्ट नहीं है तो पकड़ो, वह कोई अंगे्रज पुल पर से जा रहा है; उसे और उसके गोरे रक्त को फेंक दो इस काली कालिंदी में। सिपाही क्यों दौडे़ जा रहे हैं, इसका पूरा समाचार वह रक्त यमुना नदी को दे देगा।
उन हजारों योद्धाओं ने ‘जय जमुनाजी’ कहकर उसका वंदन किया। यमुना से दिल्ली शहर को जोड़नेवाले नाव के पुल पर से भारतीय घोड़े दोड़ते चले जा रहे थे। पर वे किसलिए दोड़ रहे हैं, यह यमुना नदी को ज्ञात है क्या? उसे यह बताए बिना जाना इष्ट नहीं है तो पकड़ो, वह कोई अंगे्रज पुल पर से जा रहा है; उसे और उसके गोरे रक्त को फेंक दो इस काली कालिंदी में। सिपाही क्यों दौडे़ जा रहे हैं, इसका पूरा समाचार वह रक्त यमुना नदी को दे देगा।