कर्नल को क्या मालूम? उसने बड़े गर्व से उन्हें शाबासी दी और वह पलटन विद्रोहियों का सामना करने चल दी। थोड़ा आगे जाते ही प्राचीर से मेरठ के घुड़सवार दौड़ते हुए आते दिखाई दिए। गुस्से से उग्रतम हुए और गोरे रक्त की अनिवार्य मांग करनेवाले उन घुड़सवारों के पीछे लाल रंग की वरदी में मेरठ का पैदल दल भी था। एक-दूसरे को देखते ही उन्होंने एक-दूसरे को सलामी दी और मेरठ की सेना दिल्ली की सेना से मिलने लगी। मेरठ की सेना
कर्नल को क्या मालूम? उसने बड़े गर्व से उन्हें शाबासी दी और वह पलटन विद्रोहियों का सामना करने चल दी। थोड़ा आगे जाते ही प्राचीर से मेरठ के घुड़सवार दौड़ते हुए आते दिखाई दिए। गुस्से से उग्रतम हुए और गोरे रक्त की अनिवार्य मांग करनेवाले उन घुड़सवारों के पीछे लाल रंग की वरदी में मेरठ का पैदल दल भी था। एक-दूसरे को देखते ही उन्होंने एक-दूसरे को सलामी दी और मेरठ की सेना दिल्ली की सेना से मिलने लगी। मेरठ की सेना