1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ने ‘फिरंगी राज्य का नाश हो’ और ‘बादशाह की जय हो’ के नारे लगाए ये नारे सुनते ही दिल्ली की सेना ने ‘मारो फिरंगी को’ की प्रति गर्जना की। यह क्या है? कहनेवाला कर्नल रिप्ले क्षण में ही गोलियांे की बौछार में भूमि


1857 का स्वातंत्र्य समर - 108

पर गिर गया और फिर उस रेजिमंेट के साथ आए सारे अंगे्रजों को एक साथ कत्ल कर दिया गया। इस तरह अपने स्वदेश-पे्रम पर फिरंगी रक्त की मुहर लगाकर मेरठ के घुड़सवार नीचे उतरे


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ने ‘फिरंगी राज्य का नाश हो’ और ‘बादशाह की जय हो’ के नारे लगाए ये नारे सुनते ही दिल्ली की सेना ने ‘मारो फिरंगी को’ की प्रति गर्जना की। यह क्या है? कहनेवाला कर्नल रिप्ले क्षण में ही गोलियांे की बौछार में भूमि


1857 का स्वातंत्र्य समर - 108

पर गिर गया और फिर उस रेजिमंेट के साथ आए सारे अंगे्रजों को एक साथ कत्ल कर दिया गया। इस तरह अपने स्वदेश-पे्रम पर फिरंगी रक्त की मुहर लगाकर मेरठ के घुड़सवार नीचे उतरे


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