और दिल्ली के सिपाहियों से गले मिलने लगे। यह समाचार सुनते ही शहर का कश्मारी दरवाजा खुल गया और उस इतिहास-प्रसिद्ध दरवाजे से ‘दीन-दीन’ की गजना करते स्वतंत्रता योद्धा दिल्ली में प्रवेश कर गए।
मेरठ सेना की दूसारी टुकड़ी कलकŸाा दरवाजे से अंदर घुसने लगी। वह दरवाजा पहले बंद किया हुआ था, परंतु इन सिपाहियों की भयानक थपकी पड़ते ह ीवह धीरे-धीरे हटने लगा और जल्दी ही उस दरवाजे पर नियुक्त पहरेवालों ने ‘दीन-दीन’ कहते
और दिल्ली के सिपाहियों से गले मिलने लगे। यह समाचार सुनते ही शहर का कश्मारी दरवाजा खुल गया और उस इतिहास-प्रसिद्ध दरवाजे से ‘दीन-दीन’ की गजना करते स्वतंत्रता योद्धा दिल्ली में प्रवेश कर गए।
मेरठ सेना की दूसारी टुकड़ी कलकŸाा दरवाजे से अंदर घुसने लगी। वह दरवाजा पहले बंद किया हुआ था, परंतु इन सिपाहियों की भयानक थपकी पड़ते ह ीवह धीरे-धीरे हटने लगा और जल्दी ही उस दरवाजे पर नियुक्त पहरेवालों ने ‘दीन-दीन’ कहते