1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ने स्वयं के प्राणों की आशा छोड़क रवह बारूदखाना शत्रु के कब्जे में न देते हुए अपने हाथों से सुलगा दिया और उस एक आवाज के साथ करीब पच्चीस सिपाही और आसपास के रास्तों पर के तीन सौ आदमी आकाश में उड़ गए।

परंतु क्रांति पक्षवालों ने इस बारूदखाने की आग में जान-बुझकर जो अपना नाम करवा लिया वह यों ही नहीं था। क्योंकि जो लोग इस बारूद के विस्फोट में बलि हुए उनके आत्मयक्ष से उस राज्य क्रांति को अपूर्व शक्ति मिली।


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ने स्वयं के प्राणों की आशा छोड़क रवह बारूदखाना शत्रु के कब्जे में न देते हुए अपने हाथों से सुलगा दिया और उस एक आवाज के साथ करीब पच्चीस सिपाही और आसपास के रास्तों पर के तीन सौ आदमी आकाश में उड़ गए।

परंतु क्रांति पक्षवालों ने इस बारूदखाने की आग में जान-बुझकर जो अपना नाम करवा लिया वह यों ही नहीं था। क्योंकि जो लोग इस बारूद के विस्फोट में बलि हुए उनके आत्मयक्ष से उस राज्य क्रांति को अपूर्व शक्ति मिली।


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