1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

लोग मृत्यु से बच पाए और राजमहल की कैद में पहुंचा दिए गए। परंतु लोकमत बादशाह के इस कृत्य के इतना विरूद्ध था कि चार-पांच दिन खींचतान करने के बाद उसे अपने कब्जे के उन पचास फिरंगियों को लोगों को सौंप देना अनिवार्य हो गया। 16 मई को एक सार्वजनिक मैदान पर वे पचास फिरंगी ले जाए गए। वह दृश्य देखने के लिए इकट्ठा हुए हजारों नागरिकों ने उनके सामने फिरंगी राज्य और अंगे्रजों की बेईमानी की पूरी-पूरी निंदा की और फिर


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लोग मृत्यु से बच पाए और राजमहल की कैद में पहुंचा दिए गए। परंतु लोकमत बादशाह के इस कृत्य के इतना विरूद्ध था कि चार-पांच दिन खींचतान करने के बाद उसे अपने कब्जे के उन पचास फिरंगियों को लोगों को सौंप देना अनिवार्य हो गया। 16 मई को एक सार्वजनिक मैदान पर वे पचास फिरंगी ले जाए गए। वह दृश्य देखने के लिए इकट्ठा हुए हजारों नागरिकों ने उनके सामने फिरंगी राज्य और अंगे्रजों की बेईमानी की पूरी-पूरी निंदा की और फिर


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