लोग मृत्यु से बच पाए और राजमहल की कैद में पहुंचा दिए गए। परंतु लोकमत बादशाह के इस कृत्य के इतना विरूद्ध था कि चार-पांच दिन खींचतान करने के बाद उसे अपने कब्जे के उन पचास फिरंगियों को लोगों को सौंप देना अनिवार्य हो गया। 16 मई को एक सार्वजनिक मैदान पर वे पचास फिरंगी ले जाए गए। वह दृश्य देखने के लिए इकट्ठा हुए हजारों नागरिकों ने उनके सामने फिरंगी राज्य और अंगे्रजों की बेईमानी की पूरी-पूरी निंदा की और फिर
लोग मृत्यु से बच पाए और राजमहल की कैद में पहुंचा दिए गए। परंतु लोकमत बादशाह के इस कृत्य के इतना विरूद्ध था कि चार-पांच दिन खींचतान करने के बाद उसे अपने कब्जे के उन पचास फिरंगियों को लोगों को सौंप देना अनिवार्य हो गया। 16 मई को एक सार्वजनिक मैदान पर वे पचास फिरंगी ले जाए गए। वह दृश्य देखने के लिए इकट्ठा हुए हजारों नागरिकों ने उनके सामने फिरंगी राज्य और अंगे्रजों की बेईमानी की पूरी-पूरी निंदा की और फिर