सिपाहियों का आदेश होते ही एक क्षण में उन पचासों के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 112
टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। सिपाही की तलवार से बचने कोई महिला या बच्चा गिड़गिड़ाने लगता तो-‘मेरठ की बेड़ियांे का बदला, गुलामी का बदला, बारूदखाने का बदला’-कहते हुए लोग बड़े जोर से चिल्लाने लगते। इस बदले की धार चढ़ी तलवार वह गिड़गिड़ाता भूरा सिर छांट देती। 11 मई को अंगे्रजों के कत्लेआम का आरंभ होकर उसकी पूर्णाहूति 16़ मई को हुई।
सिपाहियों का आदेश होते ही एक क्षण में उन पचासों के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 112
टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। सिपाही की तलवार से बचने कोई महिला या बच्चा गिड़गिड़ाने लगता तो-‘मेरठ की बेड़ियांे का बदला, गुलामी का बदला, बारूदखाने का बदला’-कहते हुए लोग बड़े जोर से चिल्लाने लगते। इस बदले की धार चढ़ी तलवार वह गिड़गिड़ाता भूरा सिर छांट देती। 11 मई को अंगे्रजों के कत्लेआम का आरंभ होकर उसकी पूर्णाहूति 16़ मई को हुई।