इस बीच सैकड़ों अंगे्रज जान बचाके दिल्ली से भाग गए। किसी ने मुंह पर काला रंग पोतकर नेटिव होने का स्वांग रचा तो कोई जंगल-जंगल भागता धूप में छिपने का साहस किया, भेद खुलते ही गांववालों के हाथों मारा गया। कोई -यात्रा में थककर रास्ते में बैठ जाने पर -पास-पड़ोस के गावंवालों द्वारा फिरंगी कहकर काट डाला गया और कोई दयालु गांववाले मिल जाने से उनकी कृपा पाकर मेरठ छावनी पहुंच गया।
बारूदखाने के विस्फोट में विद्रोही
इस बीच सैकड़ों अंगे्रज जान बचाके दिल्ली से भाग गए। किसी ने मुंह पर काला रंग पोतकर नेटिव होने का स्वांग रचा तो कोई जंगल-जंगल भागता धूप में छिपने का साहस किया, भेद खुलते ही गांववालों के हाथों मारा गया। कोई -यात्रा में थककर रास्ते में बैठ जाने पर -पास-पड़ोस के गावंवालों द्वारा फिरंगी कहकर काट डाला गया और कोई दयालु गांववाले मिल जाने से उनकी कृपा पाकर मेरठ छावनी पहुंच गया।
बारूदखाने के विस्फोट में विद्रोही