1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

इस बीच सैकड़ों अंगे्रज जान बचाके दिल्ली से भाग गए। किसी ने मुंह पर काला रंग पोतकर नेटिव होने का स्वांग रचा तो कोई जंगल-जंगल भागता धूप में छिपने का साहस किया, भेद खुलते ही गांववालों के हाथों मारा गया। कोई -यात्रा में थककर रास्ते में बैठ जाने पर -पास-पड़ोस के गावंवालों द्वारा फिरंगी कहकर काट डाला गया और कोई दयालु गांववाले मिल जाने से उनकी कृपा पाकर मेरठ छावनी पहुंच गया।

बारूदखाने के विस्फोट में विद्रोही


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इस बीच सैकड़ों अंगे्रज जान बचाके दिल्ली से भाग गए। किसी ने मुंह पर काला रंग पोतकर नेटिव होने का स्वांग रचा तो कोई जंगल-जंगल भागता धूप में छिपने का साहस किया, भेद खुलते ही गांववालों के हाथों मारा गया। कोई -यात्रा में थककर रास्ते में बैठ जाने पर -पास-पड़ोस के गावंवालों द्वारा फिरंगी कहकर काट डाला गया और कोई दयालु गांववाले मिल जाने से उनकी कृपा पाकर मेरठ छावनी पहुंच गया।

बारूदखाने के विस्फोट में विद्रोही


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