इतनी घुणा उत्पन्न हो गई थी। इसलिए मेरठ की ललनाओं के बाग्बाणों से दिल्ली का सिंहासन प्रादुर्भूत हुआ।
ये पांच दिन हिंदुस्थान के इतिहास में हमेशा चिरसमरणीय रहें, क्योंकि मुहम्मद गजनवी के आक्रमणों से प्रारंभ हुआ हिंदू और मुसलमान का प्रचंड युद्ध समाप्त हो जाने की घोषणा इन पांच दिनों में हुई और हिंदू और मुसलमान के बीच का परायापन तथा विजतेा-विजित भाव नामशेष होकर उनमें आपसी बंधुत्व भाव इन्हीें दिनों में
इतनी घुणा उत्पन्न हो गई थी। इसलिए मेरठ की ललनाओं के बाग्बाणों से दिल्ली का सिंहासन प्रादुर्भूत हुआ।
ये पांच दिन हिंदुस्थान के इतिहास में हमेशा चिरसमरणीय रहें, क्योंकि मुहम्मद गजनवी के आक्रमणों से प्रारंभ हुआ हिंदू और मुसलमान का प्रचंड युद्ध समाप्त हो जाने की घोषणा इन पांच दिनों में हुई और हिंदू और मुसलमान के बीच का परायापन तथा विजतेा-विजित भाव नामशेष होकर उनमें आपसी बंधुत्व भाव इन्हीें दिनों में