1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

प्रकट हुआ। मुसलमानों की परतंत्रता से श्री शिवराज, प्रताप सिंह, छत्रसाल, प्रतापादित्य, गुरू गोविंद सिंह तथा महादजी शिंदे द्वारा मुक्त हुई भारत माता ने-‘इसके बाद तुम सब समान और सरोहर हो और मैं तुम दोनों की मां हूं, इस दिव्य मंत्र का उच्चारण किया। हिंदुस्थान अपना देश है और हमस ब सगे भाई हैं, ऐसी गर्जना करते हिंदू-मुसलमानों ने सम समानता से और एकमत से दिल्ली के तख्त पर स्वराज्य का उभय स्वीकृत झंडा तभी खड़ा


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प्रकट हुआ। मुसलमानों की परतंत्रता से श्री शिवराज, प्रताप सिंह, छत्रसाल, प्रतापादित्य, गुरू गोविंद सिंह तथा महादजी शिंदे द्वारा मुक्त हुई भारत माता ने-‘इसके बाद तुम सब समान और सरोहर हो और मैं तुम दोनों की मां हूं, इस दिव्य मंत्र का उच्चारण किया। हिंदुस्थान अपना देश है और हमस ब सगे भाई हैं, ऐसी गर्जना करते हिंदू-मुसलमानों ने सम समानता से और एकमत से दिल्ली के तख्त पर स्वराज्य का उभय स्वीकृत झंडा तभी खड़ा


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