दिन के भोर की रात थी। जिन्हें वह भावी भोर दिखने लगी वे नींद छोड़कर उठे। परंतु जिन्हें वह तत्कालीन रात ही दिखी वे अपना गुलामी का खींचा हुआ ओढ़ावन और खींचकर सो गए। इन उनींेदे लोगों में कुभकर्ण का सम्मान पानेवाले पटियाला, नाभा और जींद-ये तीन रियासतें थी। इन रियासतों के हाथों में सन् 1857 की क्रांति का जीवन या मृत्यु थी। ये रियासतें दिल्ली और अंबाला के बीच में थी, अतः उनके आधार के बिना अंगे्रजों की पीठ बिलकुल
दिन के भोर की रात थी। जिन्हें वह भावी भोर दिखने लगी वे नींद छोड़कर उठे। परंतु जिन्हें वह तत्कालीन रात ही दिखी वे अपना गुलामी का खींचा हुआ ओढ़ावन और खींचकर सो गए। इन उनींेदे लोगों में कुभकर्ण का सम्मान पानेवाले पटियाला, नाभा और जींद-ये तीन रियासतें थी। इन रियासतों के हाथों में सन् 1857 की क्रांति का जीवन या मृत्यु थी। ये रियासतें दिल्ली और अंबाला के बीच में थी, अतः उनके आधार के बिना अंगे्रजों की पीठ बिलकुल