था। अतः उस ओर मुंह मारने का प्रयास करने में अंग्रेजों को सफलता नहीं मिल रही थी। दाई ओर तोपों और संगीनों की लड़ाई अच्छी जम रही थी, इतने में अंग्रेजों की मार के सामने बिल्कुल न टिकते हुए क्रांतिकारियों का बायां बाजू उखड़ने लगा। यह देखते ही उनकी पंक्तियों में भगदड़ मच गई और पांच तोपों को शत्रु के हाथों छोड़कर वे दिल्ली लौट आए। इस पहली लड़ाई में तत्काल मृत्यु गले लगाई। अन्य अपने कर्तव्य करें न करें, परंतु स्वयं
था। अतः उस ओर मुंह मारने का प्रयास करने में अंग्रेजों को सफलता नहीं मिल रही थी। दाई ओर तोपों और संगीनों की लड़ाई अच्छी जम रही थी, इतने में अंग्रेजों की मार के सामने बिल्कुल न टिकते हुए क्रांतिकारियों का बायां बाजू उखड़ने लगा। यह देखते ही उनकी पंक्तियों में भगदड़ मच गई और पांच तोपों को शत्रु के हाथों छोड़कर वे दिल्ली लौट आए। इस पहली लड़ाई में तत्काल मृत्यु गले लगाई। अन्य अपने कर्तव्य करें न करें, परंतु स्वयं