उस शूर सिपाही के स्तुति स्तोत्र गाने में क्या उसके देशबंधुओं को नहीं रंगना चाहिए? पर इस शहीद का नाम भी इतिहास को ज्ञात नहीं। इस देशवीर के लिए ‘के’ कहता है-‘‘विद्रोहियों में भी ऐसे अनेक शूरवीर विद्यमान थे जो अपने राष्ट्र-कार्य की सफलता हेतु प्रसन्न वदन मृत्यु का आंलिगन करने को तत्पर रहते थे तथा काल को भी चुनौती देते थे।
इस पहली लड़ाई में अंगे्रजों की पूर्ण विजय हो जाने से कलकŸाा तक इस अनुमान से डाक
उस शूर सिपाही के स्तुति स्तोत्र गाने में क्या उसके देशबंधुओं को नहीं रंगना चाहिए? पर इस शहीद का नाम भी इतिहास को ज्ञात नहीं। इस देशवीर के लिए ‘के’ कहता है-‘‘विद्रोहियों में भी ऐसे अनेक शूरवीर विद्यमान थे जो अपने राष्ट्र-कार्य की सफलता हेतु प्रसन्न वदन मृत्यु का आंलिगन करने को तत्पर रहते थे तथा काल को भी चुनौती देते थे।
इस पहली लड़ाई में अंगे्रजों की पूर्ण विजय हो जाने से कलकŸाा तक इस अनुमान से डाक