यह भी कोई अस्वीकार नहीं कर सकता। वैसी ही ऐतिहासिक उत्क्रांति से भारतभूमि की घटना गुजर रही थी। गुलामी की आंच हिंदुस्थानी लोगों को अच्छी तरह लग जाने से वे संगठित होने लगे थे। परंतु पंजाब को यह गुलामगिरी की आंच पूरी तरह लगने में दस वर्ष की अवधिक कम थी और इसीलिए विशेषतः सिख सन् 1857 के उबलते राष्ट्र-तेज में विलीन न हो सके थे।
पंजाब के अंगे्रज अधिकारियों के ध्यान में यह सत्य आ गया था और इसीलिए उन्होंने
यह भी कोई अस्वीकार नहीं कर सकता। वैसी ही ऐतिहासिक उत्क्रांति से भारतभूमि की घटना गुजर रही थी। गुलामी की आंच हिंदुस्थानी लोगों को अच्छी तरह लग जाने से वे संगठित होने लगे थे। परंतु पंजाब को यह गुलामगिरी की आंच पूरी तरह लगने में दस वर्ष की अवधिक कम थी और इसीलिए विशेषतः सिख सन् 1857 के उबलते राष्ट्र-तेज में विलीन न हो सके थे।
पंजाब के अंगे्रज अधिकारियों के ध्यान में यह सत्य आ गया था और इसीलिए उन्होंने