1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

आज जितना हो सके उतना लाभ ले लेना बुद्धिमानी है। इस भविष्य के अतिरिक्त सिख लोगों में दिल्ली के प्रति अधिक गुस्सा दिलाने के लिए एक झूठी घोषणा की गइ्र कि दिल्ली में बादशाह ने यह आदेश जारी किया है कि ‘सारे सिखों को एक साथ कत्ल किया जाए!’ अरे रे! बेचारा गरीब बादशाह!! इसी समय वह दिल्ली की सड़कों पर स्वयं घूम-घूमकर यह कह रहा था कि यह युद्व केवल फिरंगियों के विरूद्ध है, अतः स्वदेशी लोगों को खरोंच तक न लगने दी जाए।


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आज जितना हो सके उतना लाभ ले लेना बुद्धिमानी है। इस भविष्य के अतिरिक्त सिख लोगों में दिल्ली के प्रति अधिक गुस्सा दिलाने के लिए एक झूठी घोषणा की गइ्र कि दिल्ली में बादशाह ने यह आदेश जारी किया है कि ‘सारे सिखों को एक साथ कत्ल किया जाए!’ अरे रे! बेचारा गरीब बादशाह!! इसी समय वह दिल्ली की सड़कों पर स्वयं घूम-घूमकर यह कह रहा था कि यह युद्व केवल फिरंगियों के विरूद्ध है, अतः स्वदेशी लोगों को खरोंच तक न लगने दी जाए।


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