तरह के व्यवसायी नागरिक भी राज्य क्रांति के ‘बीज’ यहां-वहां छितराए हुए थे। मियां मीर के सिपाहियों को निःशस्त्र करने के बाद जल्दी ही ज्ञात हुआ कि वे जिस पर्वत पर शांति से सो रहे थे उसमें कितने विस्फोटक पदार्थ भरे पड़े हैं। लाहौर और अमृतसर के किले यद्यपि अंगे्रजों ने सुरक्षित कर लिये, तब भी फिरोजपुर में रखा गोला-बारूद का भंडार अभी सुरक्षित ही था। उस भंडार के लालच में वहां के नेटिव सिपाही विद्रोह करने को तैयार हैं या नहीं,
तरह के व्यवसायी नागरिक भी राज्य क्रांति के ‘बीज’ यहां-वहां छितराए हुए थे। मियां मीर के सिपाहियों को निःशस्त्र करने के बाद जल्दी ही ज्ञात हुआ कि वे जिस पर्वत पर शांति से सो रहे थे उसमें कितने विस्फोटक पदार्थ भरे पड़े हैं। लाहौर और अमृतसर के किले यद्यपि अंगे्रजों ने सुरक्षित कर लिये, तब भी फिरोजपुर में रखा गोला-बारूद का भंडार अभी सुरक्षित ही था। उस भंडार के लालच में वहां के नेटिव सिपाही विद्रोह करने को तैयार हैं या नहीं,