लखनऊ की गुप्त समिति ने काबुल के अमीर की सहायता मांगने का प्रयास किया था। क्योंकि सन् 1856 के अगस्त माह में मि. फारसिथ के हाथ एक पत्र पड़ा था जिसमें यह स्पष्ट लिखा था- ‘‘लखनऊ के मुसलमानों ने अमीर दोस्त मोहम्मद से संबंध जोड़े हैं। अवध का राज्य अधिगृहीत हो गया है और अब हैदराबाद पर एक
1857 का स्वातंत्र्य समर - 129
कुल्हाड़ी चलते ही मुसलमानी सŸाा का नाम भी फिर से सुनाई न देगा। इसका समय पर ही कुछ उपचार
लखनऊ की गुप्त समिति ने काबुल के अमीर की सहायता मांगने का प्रयास किया था। क्योंकि सन् 1856 के अगस्त माह में मि. फारसिथ के हाथ एक पत्र पड़ा था जिसमें यह स्पष्ट लिखा था- ‘‘लखनऊ के मुसलमानों ने अमीर दोस्त मोहम्मद से संबंध जोड़े हैं। अवध का राज्य अधिगृहीत हो गया है और अब हैदराबाद पर एक
1857 का स्वातंत्र्य समर - 129
कुल्हाड़ी चलते ही मुसलमानी सŸाा का नाम भी फिर से सुनाई न देगा। इसका समय पर ही कुछ उपचार